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450 साल पुराने नक्शे की गलती और नए प्रक्षेपण का सच

7/9/2026, 8:44:08 pm
450 साल पुराने नक्शे की गलती और नए प्रक्षेपण का सच
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बचपन में हमने जो दुनिया का नक्शा देखा, उसमें ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग बराबर बड़े दिखते थे। वह नक्शा मर्केटर प्रक्षेपण पर बना था, जिसे 1569 में जेरार्डस मर्केटर ने तैयार किया था। मर्केटर ने नौसैनिकों के लिए सीधी रेखा में दिशा दिखाने वाला नक्शा बनाया, लेकिन इसमें ध्रुवों के पास के क्षेत्र बहुत फैले हुए दिखते हैं। नतीजा यह हुआ कि अफ्रीका का वास्तविक आकार ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा होने के बावजूद नक्शे पर दोनों लगभग समान दिखते थे। इस विकृति ने कई पीढ़ियों को भ्रमित किया और महाद्वीपों के असली अनुपात को समझने में बाधा डाली। पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिकों ने इस समस्या को दूर करने के लिए नए प्रक्षेपण विकसित किए। पीटर्स प्रक्षेपण (1974) और विंकेल ट्रिपल (1921) जैसे नक्शे क्षेत्रफल को सही अनुपात में दिखाते हैं। इनमें ध्रुवीय क्षेत्र कम फैले होते हैं और महाद्वीपों का आकार वास्तविकता के करीब होता है। आज डिजिटल मानचित्र और जीआईएस सॉफ्टवेयर भी विभिन्न प्रक्षेपणों को तुरंत बदल सकते हैं। इससे शोधकर्ता अपनी जरूरत के अनुसार सबसे उपयुक्त नक्शा चुन सकते हैं। भारत में भी एनसीईआरटी ने नई पाठ्यपुस्तकों में पीटर्स प्रक्षेपण आधारित नक्शे शामिल किए हैं, जिससे विद्यार्थियों को सही भौगोलिक ज्ञान मिले। स्कूलों और मीडिया में अब इन नए नक्शों का उपयोग बढ़ रहा है। बच्चे जब सही अनुपात वाला नक्शा देखते हैं, तो उन्हें दुनिया की भौगोलिक विविधता समझने में आसानी होती है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन और संसाधन वितरण जैसे मुद्दों पर चर्चा भी अधिक सटीक हो जाती है। इस तरह 450 साल पुराने नक्शे की सीमाएं अब टूट रही हैं। आधुनिक प्रक्षेपण हमें पृथ्वी की असली तस्वीर देते हैं और नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों तथा आम नागरिकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद करते हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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