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गर्भावस्था में एनीमिया से बच्चे का दिमाग 4% छोटा, सीखने की क्षमता पर असर

12/9/2026, 10:46:07 pm
गर्भावस्था में एनीमिया से बच्चे का दिमाग 4% छोटा, सीखने की क्षमता पर असर
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एक नई अध्ययन ने गर्भावस्था में एनीमिया के दूरगामी असर को उजागर किया है और बताया है कि मां के खून में हीमोग्लोबिन की कमी बच्चे के मस्तिष्क के आकार को प्रभावित कर सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम था, उनके नवजात शिशुओं का मस्तिष्क औसतन चार प्रतिशत छोटा पाया गया। यह कमी सीधे सीखने की क्षमता, याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति पर असर डाल सकती है, जिससे स्कूल में प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। अध्ययन में पांच हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था और उनके हीमोग्लोबिन स्तर को दूसरी और तीसरी तिमाही में नियमित रूप से मापा गया। जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन निर्धारित सीमा से नीचे रहा, उनके बच्चों के MRI स्कैन में मस्तिष्क के ग्रे मैटर और व्हाइट मैटर दोनों का आयतन कम मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि आयरन की कमी न्यूरॉन्स के निर्माण और सिनैप्स के विकास को धीमा कर देती है, जिसका असर जीवन भर रह सकता है। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं को रोजाना आयरन और फोलिक एसिड की गोली लेने की सलाह देते हैं, साथ ही हरी सब्जियां, दाल और गुड़ जैसे प्राकृतिक स्रोत भी अपनाने को कहते हैं। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में अब एनीमिया स्क्रीनिंग को अनिवार्य कर दिया गया है और आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर हीमोग्लोबिन जांच करने का निर्देश दिया गया है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि गर्भधारण से पहले ही हीमोग्लोबिन की जांच करवाएं और यदि स्तर कम हो तो तुरंत आयरन थेरेपी शुरू करें, ताकि भ्रूण के मस्तिष्क विकास पर कोई बुरा असर न पड़े। समय पर उपचार और पौष्टिक आहार से बच्चे के दिमागी विकास को सामान्य रखा जा सकता है, जिससे भविष्य में सीखने की समस्याएं कम होंगी। भारत में लगभग 50 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और पौष्टिक भोजन की अनुपलब्धता इस समस्या को और बढ़ा देती है। समुदाय आधारित कार्यक्रमों के जरिए आयरन युक्त खाद्य पदार्थों की आपूर्ति और नियमित जांच से इस प्रवृत्ति को रोका जा सकता है। विशेषज्ञ यह भी सुझाव देते हैं कि गर्भवती महिलाओं को धूप में बैठकर विटामिन डी की पूर्ति करनी चाहिए, क्योंकि विटामिन डी भी हीमोग्लोबिन निर्माण में मदद करता है। अगर समय रहते कदम उठाए जाएं तो आने वाली पीढ़ी के मानसिक विकास को सुरक्षित रखा जा सकता है और देश की उत्पादकता में भी सुधार होगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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