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मोतिहारी के स्कूलों में प्री-फैब भवनों का लाभ अधूरा, बच्चे अब भी खुले में पढ़ने को मजबूर

1/9/2026, 6:48:32 pm
मोतिहारी के स्कूलों में प्री-फैब भवनों का लाभ अधूरा, बच्चे अब भी खुले में पढ़ने को मजबूर
मोतिहारी। जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर माहौल देने के लिए बनाए गए प्री-फैब्रिकेटेड (प्री-फैब) भवन अपना मकसद पूरा नहीं कर पा रहे। कई स्कूलों में निर्माण अधूरा पड़ा है तो कहीं तैयार भवनों का उपयोग ही नहीं हो रहा। नतीजा यह कि छात्र-छात्राएं अब भी खुले आसमान या जर्जर कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिले में करीब 150 स्कूलों के लिए प्री-फैब भवन स्वीकृत हुए थे। इनमें से अधिकांश का काम शुरू तो हुआ, लेकिन तय समय पर पूरा नहीं हो सका। कई जगह ठेकेदारों ने काम बीच में छोड़ दिया। कुछ स्कूलों में सामग्री पहुंची ही नहीं। अभिभावकों और शिक्षकों की शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी बताते हैं कि निर्माण एजेंसी को कई बार नोटिस दिया गया। इसके बावजूद काम रफ्तार नहीं पकड़ सका। अब विभाग नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की बात कह रहा है। लेकिन इसमें भी वक्त लगेगा। तब तक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती रहेगी। अभिभावक रामकिशोर प्रसाद कहते हैं, "मेरा बेटा पांचवीं में पढ़ता है। स्कूल में कमरा नहीं होने से बरामदे में बैठता है। बारिश में पानी भर जाता है। अधिकारी सुनते नहीं।" ऐसी शिकायतें लगभग हर उस स्कूल से आ रही हैं जहां प्री-फैब भवन बने हैं या बनने थे। जिला शिक्षा पदाधिकारी का कहना है कि मामला संज्ञान में है। लापरवाह एजेंसियों पर कार्रवाई होगी। जल्द ही अधूरे काम पूरे कराए जाएंगे। लेकिन धरातल पर अभी तक कोई ठोस पहल नहीं दिखी। ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की हालत और खराब है। वहां न तो अधिकारी पहुंचते हैं, न ही ठेकेदार। शिक्षाविदों का मानना है कि बुनियादी ढांचे की कमी से ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। प्री-फैब तकनीक तेज और सस्ती मानी जाती है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में लापरवाही ने मकसद ही विफल कर दिया। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, ऐसी योजनाएं कागजों तक सिमटी रहेंगी। समाचार स्रोत: Google News — Motihari (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Motihari (Hindi)

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