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नेपाल बाढ़: चितवन में 200 से ज्यादा गुमनाम शव, डीएनए लेकर कब्रों में दफन; मचा बवाल

31/8/2026, 7:11:02 am
नेपाल बाढ़: चितवन में 200 से ज्यादा गुमनाम शव, डीएनए लेकर कब्रों में दफन; मचा बवाल
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चितवन में पिछले हफ्ते आई भयानक बाढ़ ने सैकड़ों जिंदगियां लील लीं। मरने वालों की तादाद 400 पार कर चुकी है, लेकिन 200 से ज्यादा शव ऐसे हैं जिनकी कोई पहचान नहीं हो पाई। न कोई आधार कार्ड, न कोई फोन, न कोई रिश्तेदार जो उन्हें पहचान सके। पानी के तेज बहाव में सब बह गया। प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती थी — शवों को कैसे संभालें। गर्मी में लाशें सड़ने लगी थीं, बीमारी फैलने का खतरा था। इसलिए जिला प्रशासन ने फैसला लिया: हर शव का डीएनए सैंपल लेकर सुरक्षित रखो, फिर उन्हें अस्थायी कब्रों में दफना दो। ताकि बाद में जब कोई परिजन आए, तो डीएनए मिलान से पहचान हो सके। पिछले तीन दिनों में चितवन के बाहरी इलाके में एक बड़ा मैदान खोदकर 200 से ज्यादा कब्रें तैयार की गईं। हर कब्र पर नंबर डाल दिया गया, डीएनए रिकॉर्ड के साथ। फोरेंसिक टीम ने हर शव से बाल, नाखून, दांत के सैंपल लिए। ये सैंपल काठमांडू की लैब में भेजे जाएंगे। लेकिन इस फैसले पर बवाल मच गया। स्थानीय लोग और मानवाधिकार संगठन कह रहे हैं कि बिना आखिरी रस्मों के दफनाना गलत है। हिंदू रीति के मुताबिक दाह संस्कार होना चाहिए। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन जल्दबाजी में सबूत मिटा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं — क्या गरीबों की लाशों की कोई कीमत नहीं? जिला अधिकारी रामप्रसाद भट्ट ने सफाई दी: "हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। शव सड़ रहे थे, महामारी का डर था। डीएनए सुरक्षित है, पहचान बाद में भी हो सकती है। कब्रें अस्थायी हैं, जरूरत पड़ी तो निकाल लेंगे।" नेपाल रेड क्रॉस के प्रवक्ता ने कहा कि वे लापता लोगों के परिजनों से संपर्क कर रहे हैं। अब तक 50 परिवारों ने अपने लोगों की गुमशुदगी दर्ज कराई है। डीएनए मिलान में महीनों लग सकते हैं। उधर, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले हफ्ते फिर भारी बारिश हो सकती है। राहत शिविरों में रह रहे हजारों लोगों के लिए यह दोहरी मुसीबत है। सरकार ने सेना और सशस्त्र पुलिस को राहत कार्य में लगाया है, लेकिन दूरदराज के गांवों तक पहुंचना अब भी मुश्किल है। चितवन की इस त्रासदी ने नेपाल की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब तक पहचान नहीं होती, ये 200 से ज्यादा कब्रें गवाह रहेंगी — एक ऐसी बाढ़ की जिसने न सिर्फ घर उजाड़े, बल्कि पहचान भी छीन ली। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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