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पाकिस्तान में आसिम मुनीर के लिए सिरदर्द बनी बलूच बगावत, हर महीने 120 जवानों की मौत

6/9/2026, 7:46:43 pm
पाकिस्तान में आसिम मुनीर के लिए सिरदर्द बनी बलूच बगावत, हर महीने 120 जवानों की मौत
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पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के लिए बलूचिस्तान की बगावत अब नासूर बन चुकी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक हर महीने औसतन 120 सुरक्षाकर्मी अपनी जान गंवा रहे हैं। यह संख्या पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ी है। बलूच विद्रोही गुट सेना के काफिलों, चौकियों और गश्ती दलों पर लगातार हमले कर रहे हैं। बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान का सबसे अशांत प्रांत रहा है। यहां बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और बलूच लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) जैसे संगठन सक्रिय हैं। ये गुट संसाधनों पर स्थानीय हक और आजादी की मांग करते हुए हथियारबंद संघर्ष चला रहे हैं। पिछले एक साल में हमलों की तीव्रता काफी बढ़ी है। सेना ने ऑपरेशन जारी रखे हैं, लेकिन विद्रोही गुरिल्ला रणनीति अपनाकर बच निकलते हैं। पहाड़ी इलाकों और कम आबादी वाले क्षेत्रों में सेना की आवाजाही मुश्किल है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक विद्रोहियों को बाहरी मदद भी मिल रही है, जिससे उनके पास आधुनिक हथियार और विस्फोटक पहुंच रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान में विकास परियोजनाओं का ऐलान किया है, लेकिन स्थानीय लोग इन्हें दिखावा मानते हैं। बेरोजगारी, गरीबी और अधिकारों की अनदेखी ने युवाओं को विद्रोही गुटों की ओर धकेला है। मानवाधिकार संगठन भी सेना के कथित अत्याचारों पर सवाल उठाते रहे हैं। जनरल मुनीर के सामने दोहरी चुनौती है: एक ओर आंतरिक सुरक्षा संभालनी है, दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी झेलना पड़ रहा है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपेक) की सुरक्षा भी दांव पर है, क्योंकि बलूच विद्रोही चीनी नागरिकों और परियोजनाओं को निशाना बनाते रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या हल नहीं होगी। राजनीतिक संवाद, संसाधनों में हिस्सेदारी और मानवाधिकारों का सम्मान जरूरी है। फिलहाल हालात बिगड़ते दिख रहे हैं और पाकिस्तानी सेना के लिए बलूचिस्तान एक खुला घाव बना हुआ है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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