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संयुक्त राष्ट्र में भारत के वोट पर भड़का पाकिस्तान, फिर उठाया कश्मीर मुद्दा

7/9/2026, 6:05:06 am
संयुक्त राष्ट्र में भारत के वोट पर भड़का पाकिस्तान, फिर उठाया कश्मीर मुद्दा
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक प्रस्ताव पर भारत के मतदान ने पाकिस्तान को नाराज कर दिया। प्रस्ताव विश्व मानचित्र पर सीमाओं के चित्रण से जुड़ा था। भारत ने अपने रुख के मुताबिक वोट दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को देश का अभिन्न हिस्सा दिखाया गया है। प्रस्ताव संख्या 78/12 में सदस्य देशों से अपील की गई थी कि वे अपने आधिकारिक मानचित्रों में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को मान्यता दें। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया क्योंकि उसके मानचित्र में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पहले से ही शामिल हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तुरंत बयान जारी किया। प्रवक्ता ने भारत के कदम को एकतरफा और गैरकानूनी बताया। कहा कि यह सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन है। इस्लामाबाद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत की विस्तारवादी नीति पर ध्यान देने की अपील की। पाकिस्तान ने कहा कि भारत का यह कदम क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकता है। विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से हस्तक्षेप की मांग भी की। भारतीय राजनयिक सूत्रों ने इन आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि भारत ने केवल अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के अनुसार मतदान किया। यह किसी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं करता। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि मतदान किसी नई नीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही स्थिति को दोहराता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान के आरोप बेबुनियाद हैं। पाकिस्तान पहले भी कई मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठाता रहा है। मगर ज्यादातर देश इसे भारत का आंतरिक मामला मानते हैं। संयुक्त राष्ट्र में भी पाकिस्तान को खास समर्थन नहीं मिला। इससे पहले भी पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और अन्य मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाया, लेकिन उसे कोई ठोस परिणाम नहीं मिला। अधिकांश देशों ने इसे द्विपक्षीय मामला माना। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की यह प्रतिक्रिया घरेलू राजनीति से प्रेरित है। आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता के बीच कश्मीर राग अलापना जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार अपनी आंतरिक चुनौतियों से ध्यान हटाने के लिए बाहरी विवाद का सहारा लेती है। पिछले महीने हुए आर्थिक सुधारों की विफलता ने जनता में असंतोष बढ़ाया है। भारत का रुख स्पष्ट है – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न अंग हैं और रहेंगे। किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का सवाल ही नहीं उठता। भारत ने दोहराया कि कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि सीमाओं की रक्षा करना राष्ट्रीय संकल्प है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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