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परशुरामपुर का सौ साल पुराना धूप का पेड़: नेपाल से आया पौधा, आज भी गांव की पहचान

8/9/2026, 6:12:09 am
परशुरामपुर का सौ साल पुराना धूप का पेड़: नेपाल से आया पौधा, आज भी गांव की पहचान
पूर्वी चंपारण जिले के परशुरामपुर गांव में एक विशाल धूप का पेड़ खड़ा है जिसकी उम्र लगभग सौ साल बताई जाती है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि इस पेड़ का पौधा नेपाल से लाया गया था और गांव के पूर्वजों ने उसे यहां रोपा था। समय के साथ पेड़ ने गहरी जड़ें जमाईं और आज उसका तना मोटा तथा छाया घनी हो गई है। पेड़ की पत्तियाँ हल्के हरे रंग की होती हैं और उनसे मधुर सुगंध निकलती है, इसलिए ग्रामीण इन्हें धूप के रूप में इस्तेमाल करते हैं। त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों में इन पत्तियों को जलाकर पवित्र वातावरण बनाने की परंपरा आज भी कायम है। पहले इस पेड़ की छाया में गांव की पंचायत बैठकें होती थीं और अब भी थके हुए राहगीर तथा किसान इसकी शीतल हवा में आराम करते हैं। खेतों में काम करने वाले किसान अक्सर जड़ के पास बैठकर पत्तियाँ चबाते हैं और ताजगी महसूस करते हैं। पेड़ के आसपास की मिट्टी उपजाऊ पाई जाती है, जिससे निकट के खेतों में गेहूं और धान की पैदावार अच्छी रहती है। पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा पुराना पेड़ कार्बन सोखकर स्थानीय जलवायु को संतुलित रखता है। ग्रामीण मिलकर पेड़ की देखभाल करते हैं; समय‑समय पर अतिरिक्त शाखाओं को काटा जाता है ताकि वे गिरकर किसी को नुकसान न पहुँचाएँ। मानसून में जल निकासी की व्यवस्था की जाती है ताकि जड़ें सड़ न जाएँ। इस संरक्षण प्रयास के कारण पेड़ आज भी स्वस्थ है और गांव का गौरव बना हुआ है। गांव के युवा इस पेड़ की कहानी को स्कूलों में सुनाते हैं और पर्यावरण जागरूकता अभियानों में इसका उदाहरण देते हैं। प्रति वर्ष गांव वाले एक छोटा उत्सव आयोजित करते हैं जिसमें पेड़ की पूजा और पत्तियों का वितरण किया जाता है। जिला प्रशासन ने भी इस पेड़ को धरोहर वृक्ष घोषित करने का प्रस्ताव रखा है ताकि इसे कानूनी संरक्षण मिल सके। वन विभाग के अधिकारी नियमित रूप से पेड़ की स्वास्थ्य जांच करते हैं और आवश्यक पोषक तत्व देते हैं। समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)

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