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पीएम मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के दौरे पर, SCO शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल
29/8/2026, 3:41:39 am

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की दो दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगे। इस यात्रा का आयोजन विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से किया है।
यात्रा के पहले चरण में मोदी ताशकंद पहुंचेंगे, जहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण पर चर्चा करेंगे।
एससीओ में भारत के अलावा चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। मोदी इस मंच का उपयोग भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को मध्य एशिया तक विस्तारित करने के लिए करेंगे।
मोदी की यात्रा का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और व्यापार बढ़ाने पर केंद्रित है। वे सदस्य देशों से संयुक्त आतंकवाद निरोधी तंत्र को मजबूत करने का आह्वान कर सकते हैं।
उज्बेकिस्तान में प्रधानमंत्री राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोएव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। बैठक में ऊर्जा, परिवहन और कृषि क्षेत्र में भारतीय निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से बात होगी।
दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) के तहत रेल और सड़क संपर्क को तेज करने पर सहमति बना सकते हैं। इससे भारत के उत्पाद मध्य एशिया और रूस तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
किर्गिस्तान में मोदी राष्ट्रपति सदर जापारोव से मुलाकात करेंगे। रक्षा उपकरणों की संयुक्त खरीद, सैन्य प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा सहयोग पर चर्चा होने की उम्मीद है।
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने पहले ही किर्गिस्तान को हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर और रडार प्रणालियों की आपूर्ति का प्रस्ताव रखा है। इस दौरे में उन प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की दिशा में प्रगति की उम्मीद है। एफटीए से भारतीय दवा, आईटी और कपड़ा निर्यात को नया बाजार मिलेगा।
एससीओ मंच पर मोदी क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं के अलावा जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा पर भी भारत का दृष्टिकोण रखेंगे। वे सदस्य देशों से संयुक्त अनुसंधान पहल शुरू करने का प्रस्ताव रख सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति मजबूत होगी। साथ ही चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भी मदद मिलेगी।
यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नई दिल्ली लौटेंगे और संसद के दोनों सदनों में यात्रा की विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगे। संसदीय समिति बाद में समझौतों की समीक्षा करेगी।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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