लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की ऑनलाइन पहचान उजागर करने पर रोक की मांग पर केंद्र व सोशल मीडिया को नोटिस भेजा

18/8/2026, 6:49:10 am
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की ऑनलाइन पहचान उजागर करने पर रोक की मांग पर केंद्र व सोशल मीडिया को नोटिस भेजा
Original publisher image
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस और जांच एजेंसियां अक्सर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आरोपियों की पहचान, तस्वीर और व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक कर देती हैं, जिससे न केवल निजता का उल्लंघन होता है बल्कि अनावश्यक सामाजिक कलंक भी उत्पन्न होता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी प्रथा आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को प्रभावित करती है और मीडिया ट्रायल को बढ़ावा देती है। याचिका में अनुरोध किया गया है कि अदालत एक निर्देश जारी करे जिससे पुलिस और जांच एजेंसियों को ऑनलाइन माध्यम से आरोपियों की पहचान प्रकट करने पर रोक लगाई जा सके। साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों को भी ऐसी सामग्री हटाने या पहुंच प्रतिबंधित करने के लिए उत्तरदायी बनाया जाए। याचिकाकर्ता ने उदाहरण दिए कि हाल के कुछ मामलों में आरोपियों की तस्वीरें वायरल हो जाने के बाद उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया या सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता के अधिकार के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। न्यायमूर्ति ने कहा कि जबकि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता महत्वपूर्ण है, फिर भी आरोपी के अधिकारों की रक्षा भी संविधान द्वारा गारंटीड है। अदालत ने केंद्र और सोशल मीडिया कंपनियों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अगले महीने तय की गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत इस दिशा में निर्देश देती है तो यह डिजिटल युग में निजता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया ट्रायल और आरोपी की पहचान सार्वजनिक करने पर चिंता जताई थी, लेकिन यह पहली बार है जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सीधे नोटिस जारी किया गया है। सोशल मीडिया कंपनियों के वकीलों ने कहा कि वे अदालत के आदेश का पालन करेंगे, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सामग्री हटाने की प्रक्रिया में तकनीकी चुनौतियाँ हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित