लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: अपील के बिना अदालत खुद से नहीं बढ़ा सकती सजा

28/8/2026, 2:21:30 am
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: अपील के बिना अदालत खुद से नहीं बढ़ा सकती सजा
Original publisher image
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया कि कोई भी अदालत अपनी तरफ से दोषी की सजा नहीं बढ़ा सकती। इसके लिए अभियोजन पक्ष की अपील जरूरी है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने ट्रिपल मर्डर के एक मामले में यह व्यवस्था दी। मामला उत्तर प्रदेश का है। निचली अदालत ने तीन हत्याओं के दोषी को उम्रकैद दी थी। हाईकोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए सजा बढ़ाकर फांसी कर दी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट ने खुद से सजा बढ़ाने का फैसला लिया था, जबकि राज्य सरकार ने अपील ही नहीं की थी। बेंच ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 386 के तहत अपीलीय अदालत को सजा बढ़ाने का अधिकार तभी मिलता है, जब अभियोजन पक्ष इसके लिए अपील करे। अदालत खुद से ऐसा नहीं कर सकती। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। दोषी को यह जानने का हक है कि उसके खिलाफ क्या मामला है और उसे अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए दोषी की फांसी की सजा को फिर से उम्रकैद में बदल दिया। साथ ही कहा कि अगर राज्य सरकार चाहे तो सजा बढ़ाने के लिए अलग से अपील दायर कर सकती है। कानूनी जानकारों के मुताबिक यह फैसला नजीर बनेगा। इससे निचली अदालतों और हाईकोर्ट को स्पष्ट दिशा मिलेगी कि वे अपनी तरफ से सजा नहीं बढ़ा सकते। दोषी के अधिकारों की रक्षा के लिए यह अहम कदम है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित