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ट्रंप के दूत पुतिन से मिले, फिर कीव रवाना; जंग खत्म होने की उम्मीद?

6/9/2026, 7:49:00 pm
ट्रंप के दूत पुतिन से मिले, फिर कीव रवाना; जंग खत्म होने की उम्मीद?
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो विशेष दूत, विटकॉफ़ और कुशनर, शुक्रवार को मॉस्को पहुंचे और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से लंबी बैठक की। दोनों पक्षों ने यूक्रेन में चल रहे सैन्य संघर्ष को रोकने के उपायों पर खुलकर बात की। पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस अपनी सुरक्षा चिंताओं और पूर्वी यूक्रेन के इलाकों पर दावे को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा, लेकिन वह बातचीत की प्रक्रिया जारी रखने के लिए तैयार है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि बैठक का मकसद दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली का रास्ता तलाशना था। बैठक समाप्त होते ही दोनों दूत तुरंत कीव के लिए रवाना हो गए। कीव में उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की और उनके शीर्ष सलाहकारों से मुलाकात की। ज़ेलेंस्की ने दोहराया कि यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा, लेकिन वह शांति के लिए रचनात्मक प्रस्तावों पर विचार करने को तैयार है। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी समझौते में रूसी सैनिकों की पूर्ण वापसी और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का सम्मान शामिल होना चाहिए। अमेरिकी दूतों ने दोनों पक्षों के सामने एक अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव रखा, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी हथियारों की तैनाती रोकने और मानवीय सहायता के लिए सुरक्षित गलियारे बनाने की बात शामिल थी। रूस ने प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही, लेकिन लिखित सहमति नहीं दी। यूक्रेन ने भी प्रस्ताव का स्वागत किया, मगर उसने साफ किया कि युद्धविराम तभी प्रभावी होगा जब रूसी सेनाएं पूरी तरह पीछे हटें। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह पहल आगामी अमेरिकी चुनावों को ध्यान में रखते हुए की गई है। ट्रंप पहले भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे युद्ध को जल्दी खत्म करना चाहते हैं, पर आलोचकों का कहना है कि बिना स्पष्ट गारंटी के केवल बातचीत से ठोस नतीजा नहीं निकलेगा। भारत ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत जारी रखने की अपील की है, क्योंकि लंबे संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और खाद्य आपूर्ति पर पड़ रहा है। आने वाले सप्ताहों में दोनों दूत फिर से मॉस्को और कीव का दौरा कर सकते हैं ताकि प्रस्तावित युद्धविराम के ब्योरे पर सहमति बन सके। यदि सहमति बनती है, तो यह यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम होगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर कायम हैं, जिससे तत्काल समाधान की उम्मीद कम ही नजर आती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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