विश्व
सुरक्षा परिषद में कानून तोड़ने वाली ताकतें: गुटेरेस ने मांगा सुधार
17/9/2026, 5:29:24 am

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने न्यूयॉर्क में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में सुरक्षा परिषद की मौजूदा कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि परिषद के कुछ स्थायी सदस्य खुद ही अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं और फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती।
गुटेरेस ने उदाहरण दिया कि हाल के वर्षों में कई ताकतवर देशों ने सीमाओं का अतिक्रमण किया, मानवाधिकारों का हनन किया और परमाणु समझौतों को तोड़ा, पर उन्हें कोई सज़ा नहीं मिली।
उनके अनुसार, यह स्थिति परिषद की विश्वसनीयता को कमजोर करती है और विश्व शांति के लिए खतरा बनती है।
महासचिव ने मांग की कि सुरक्षा परिषद का विस्तार किया जाए, नए स्थायी और अस्थायी सदस्य जोड़े जाएं और वीटो अधिकार की समीक्षा हो।
उन्होंने यह भी कहा कि परिषद के फैसलों को बाध्यकारी बनाने के लिए एक स्वतंत्र न्यायिक तंत्र बनाया जाए।
भारत, ब्राजील, जापान और जर्मनी जैसे देश लंबे समय से परिषद में स्थायी सीट की मांग कर रहे हैं; गुटेरेस के बयान से उनकी मांग को नई ताकत मिली है।
हालांकि, कुछ प्रमुख शक्तियों ने सुधार के प्रस्ताव को अपने राष्ट्रीय हितों के विपरीत बताया है और वीटो छोड़ने से इनकार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वीटो सुधार के परिषद का कोई भी नया ढांचा प्रभावी नहीं होगा।
गुटेरेस ने अंत में कहा कि विश्व समुदाय को सामूहिक जिम्मेदारी लेनी होगी और कानून का पालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि भविष्य में किसी भी देश को नियम तोड़ने की छूट न मिले।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के आगामी सत्र में गुटेरेस के प्रस्ताव पर चर्चा होगी और सदस्य देशों से सुधार के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया जाएगा।
विश्व के कई गैर-सरकारी संगठनों ने भी गुटेरेस के बयान का स्वागत किया है और कहा है कि परिषद की जवाबदेही तय करना अब अनिवार्य हो गया है।
इस बीच, चीन और रूस जैसे स्थायी सदस्यों ने वीटो अधिकार को बनाए रखने पर जोर दिया है, जबकि अमेरिका और फ्रांस ने सीमित सुधार का समर्थन किया है।
जानकारों का कहना है कि अगर वीटो व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ तो परिषद की प्रासंगिकता आगे भी सवालों के घेरे में रहेगी।
अंत में, गुटेरेस ने सभी देशों से अपील की कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करें और परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वशील, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में सहयोग दें।
संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में संशोधन की प्रक्रिया लंबी है, लेकिन गुटेरेस का स्पष्ट संदेश है कि विलंब अब स्वीकार्य नहीं है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
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