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बिना अलार्म उठना: एक हफ़्ते के प्रयोग से मिले नतीजे

24/8/2026, 8:22:10 am
बिना अलार्म उठना: एक हफ़्ते के प्रयोग से मिले नतीजे
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सुबह बिना अलार्म के उठना कई लोगों के लिए सपना लगता है, लेकिन एक हफ़्ते के प्रयोग ने इसे मुमकिन साबित किया। BBC हिंदी के रिपोर्टर ने खुद को सात दिन तक बिना किसी घड़ी के जगाने की कोशिश की। पहले दिन शरीर ने पुरानी आदत नहीं छोड़ी, इसलिए नींद देर से खुली। दूसरे दिन से रोज़ रात को एक ही समय पर सोने की आदत डाली गई। रात को रोशनी कम करने और मोबाइल बंद करने से मेलाटोनिन का स्तर बढ़ा। सुबह खिड़की खोलकर प्राकृतिक रोशनी आने दी, जिससे शरीर की घड़ी खुद बखुद सेट हो गई। तीसरे दिन से आँखें खुद ही खुलने लगीं, बिना किसी आवाज़ के। विशेषज्ञ बताते हैं कि नियमित सोने‑जागने का चक्र शरीर की आंतरिक घड़ी को मजबूत करता है। कैफीन दोपहर के बाद न पीना और हल्का व्यायाम शाम को करना भी मददगार साबित हुआ। हफ़्ते के अंत में रिपोर्टर ने महसूस किया कि दिन भर ऊर्जा बनी रहती है और थकान कम होती है। हालांकि, हर किसी के लिए यह तरीका एक जैसा काम नहीं करेगा, क्योंकि जीवनशैली अलग होती है। फिर भी, छोटे‑छोटे बदलाव अपनाकर कोई भी बिना अलार्म के समय पर उठ सकता है। नींद विशेषज्ञ डॉ. अनुपम शर्मा कहते हैं कि नियमित समय पर सोना‑जागना शरीर के हार्मोन संतुलन को बनाए रखता है। उन्होंने यह भी बताया कि अंधेरे कमरे में सोने से गहरी नींद आती है और सुबह जल्दी उठना आसान होता है। प्रयोग के दौरान रिपोर्टर ने अपने फोन को बेडरूम से बाहर रखा, जिससे नींद में बाधा नहीं आई। सुबह उठने के बाद पांच मिनट की स्ट्रेचिंग और एक गिलास पानी पीने से शरीर सक्रिय हो जाता है। इस तरह के छोटे‑छोटे कदम मिलकर बड़ी आदत बन जाते हैं और अलार्म की ज़रूरत खत्म हो जाती है। अगर आप भी कोशिश करना चाहते हैं, तो पहले हफ्ते केवल सोने‑जागने का समय तय करें। फिर धीरे‑धीरे रोशनी, कैफीन और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें। कुछ दिनों में ही शरीर खुद बखुद जागने लगेगा। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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