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चांद पर किसका हक़? ट्रंप के दावे और अंतरराष्ट्रीय क़ानून की हक़ीक़त

8/9/2026, 12:37:59 am
चांद पर किसका हक़? ट्रंप के दावे और अंतरराष्ट्रीय क़ानून की हक़ीक़त
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चांद पर मालिकाना हक़ को लेकर नई बहस छिड़ गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बयान में कहा कि चांद उनका है। इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग मज़ाक उड़ा रहे हैं, लेकिन कुछ गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 1967 की बाहरी अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) यह तय करती है कि कोई भी देश या निजी संस्था किसी खगोलीय पिंड पर संप्रभुता नहीं जता सकती। संधि के अनुसार चांद समेत सभी ग्रह और उपग्रह मानवता की साझी संपत्ति हैं। इसके बावजूद कई निजी कंपनियाँ चांद की ज़मीन बेचने का विज्ञापन देती हैं। ये बिक्री केवल प्रतीकात्मक होती है और कानूनी रूप से मान्य नहीं होती। भारत, चीन, रूस और यूरोपीय संघ जैसे देश अपने चंद्र मिशन भेज चुके हैं, लेकिन वे भी केवल वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र की अंतरिक्ष समिति (COPUOS) समय‑समय पर नियमों की समीक्षा करती रहती है। जानकारों का कहना है कि भविष्य में चांद पर संसाधन निकालने की होड़ बढ़ सकती है, इसलिए नए समझौतों की ज़रूरत पड़ेगी। फिलहाल ट्रंप का बयान केवल राजनीतिक बयानबाज़ी है, कानूनी तौर पर उसका कोई आधार नहीं है। आम नागरिकों को यह समझना चाहिए कि चांद किसी एक व्यक्ति या देश का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का साझा विरासत है। अमेरिका ने 2015 में Commercial Space Launch Competitiveness Act पारित किया, जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी नागरिक चांद या अन्य खगोलीय पिंडों से निकाले गए संसाधनों का मालिक हो सकते हैं, लेकिन यह संप्रभुता नहीं देता। इस कानून को कई देशों ने चुनौती दी क्योंकि यह बाहरी अंतरिक्ष संधि के विपरीत लगता है। 2020 में NASA ने Artemis Accords जारी किए, जिनमें चांद पर शांतिपूर्ण खोज, पारदर्शिता और संसाधनों के उपयोग के सिद्धांत तय किए गए हैं। भारत सहित 30 से अधिक देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं, जबकि चीन और रूस ने अभी तक इससे दूरी बनाए रखी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक नया अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं आता, चांद पर किसी भी निजी या राष्ट्रीय दावे की कानूनी वैधता संदिग्ध रहेगी। इसलिए ट्रंप का बयान केवल प्रचार है, और चांद की असली मालिक मानवता ही रहेगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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