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युवा मन की चुप्पी: हर दूसरा दर्द छिपाता है, केवल 9% लेते हैं पेशेवर मदद

12/9/2026, 10:53:33 pm
युवा मन की चुप्पी: हर दूसरा दर्द छिपाता है, केवल 9% लेते हैं पेशेवर मदद
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नई दिल्ली: देश के युवा अपने मन की बात कहने से कतराते हैं। अमर उजाला के ताजा सर्वे के मुताबिक 49.5 फीसदी युवा अपनी भावनाएं छिपा लेते हैं। सिर्फ 9.2 फीसदी ही किसी मनोचिकित्सक या काउंसलर के पास जाते हैं। वहीं, 13.6 फीसदी युवाओं को ही ऐसा कोई मिलता है जो बिना जज किए उनकी बात सुन ले। सर्वे में 18 से 28 साल के 5,200 से ज्यादा युवाओं को शामिल किया गया। बड़े शहरों के साथ छोटे कस्बों के युवा भी इसमें हिस्सा ले रहे थे। नतीजे बताते हैं कि सामाजिक दबाव, परिवार की उम्मीदें और नौकरी की अनिश्चितता मुख्य वजहें हैं जिनके चलते युवा खुलकर बोल नहीं पाते। मनोवैज्ञानिक डॉ. रेखा शर्मा कहती हैं, "जब युवा अपनी तकलीफ बांट नहीं पाते, तो अंदर ही अंदर तनाव बढ़ता है। यह आगे चलकर डिप्रेशन या एंग्जायटी का रूप ले सकता है।" वे सुझाव देती हैं कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर मेंटल हेल्थ वर्कशॉप अनिवार्य की जाएं। सरकार की ओर से चलाए जा रहे 'मनोदर्पण' हेल्पलाइन और टेली-मनोचिकित्सा सेवाओं का प्रचार अभी कम है। सर्वे में शामिल केवल 22 फीसदी युवाओं को इन सेवाओं की जानकारी थी। विशेषज्ञ मानते हैं कि सोशल मीडिया पर सही जानकारी फैलाकर और पीयर-सपोर्ट ग्रुप बनाकर इस खाई को पाटा जा सकता है। युवा कार्यकर्ता अर्जुन मेहता का कहना है, "हमें दोस्तों और परिवार में ऐसा माहौल बनाना होगा जहां कोई भी बिना डरे अपनी बात कह सके। तभी ये आंकड़े बदलेंगे।" समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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