लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

अमेरिका ने 30 साल से ऊपर के सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन जांच अनिवार्य की

18/9/2026, 2:56:34 am
अमेरिका ने 30 साल से ऊपर के सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन जांच अनिवार्य की
Original publisher image
अमेरिका ने अपने सैनिकों की सेहत पर नया नियम लागू किया है। पेंटागन ने हाल ही में जारी गाइडलाइन में कहा है कि 30 साल की उम्र पार कर चुके हर पुरुष सैनिक की टेस्टोस्टेरोन जांच हर साल अनिवार्य होगी। इस नियम का असर लगभग 1.3 मिलियन सक्रिय ड्यूटी कर्मियों पर पड़ेगा, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा 30 वर्ष से अधिक आयु का है। इस कदम का मकसद सैनिकों की शारीरिक क्षमता और मानसिक स्थिरता को बनाए रखना है। अधिकारियों का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ हार्मोन का स्तर गिरता है, जिससे ड्यूटी पर प्रदर्शन, सहनशक्ति और तनाव सहने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। पेंटागन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कई अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि कम टेस्टोस्टेरोन से मांसपेशियों की ताकत और मूड में बदलाव आ सकते हैं। नई नीति के तहत प्रत्येक वर्ष एक बार रक्त नमूना लिया जाएगा और लैब में टेस्टोस्टेरोन का स्तर मापा जाएगा। यदि स्तर सामान्य सीमा से कम पाया जाता है, तो चिकित्सकीय सलाह, हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी या जीवनशैली में बदलाव की सिफारिश की जाएगी। सेना ने इसके लिए विशेष क्लिनिक स्थापित करने की योजना भी बनाई है। पेंटागन के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल पुरुष सैनिकों पर लागू होगा। महिला सैनिकों के लिए पहले से अलग स्वास्थ्य मानक मौजूद हैं, जिनमें हार्मोन प्रोफाइल की निगरानी अलग प्रोटोकॉल के तहत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से लंबी अवधि में सेना की तैयारियों पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि कुछ आलोचकों ने निजता, अनावश्यक मेडिकल हस्तक्षेप और संभावित भेदभाव पर चिंता जताई है। नागरिक अधिकार संगठनों ने डेटा सुरक्षा और सहमति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी कांग्रेस में भी इस नीति पर चर्चा चल रही है। कई सांसदों ने पूछा है कि जांच की लागत, बीमा कवरेज और डेटा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। रक्षा बजट समिति ने अगले सत्र में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सेना ने आश्वासन दिया है कि सभी डेटा गोपनीय रखा जाएगा और केवल चिकित्सा टीम ही इसे देख सकेगी। नया नियम अगले वित्त वर्ष से पूरी तरह लागू हो जाएगा और इसकी समीक्षा हर दो साल में की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सहयोगी देशों ने इस पहल का अध्ययन शुरू कर दिया है। ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं भी अपने स्वास्थ्य प्रोटोकॉल में हार्मोन स्क्रीनिंग को शामिल करने पर विचार कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मानक प्रक्रिया वैश्विक सैन्य स्वास्थ्य मानकों को बेहतर बना सकती है। सैनिकों के परिवार संगठनों ने भी स्वागत किया है, क्योंकि वे लंबे समय से स्वास्थ्य निगरानी में सुधार की मांग कर रहे थे। हालांकि वे यह भी चाहते हैं कि जांच की प्रक्रिया सरल, तेज और बिना किसी नौकरशाही बाधा के हो। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

संबंधित