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काठमांडू के अस्पताल के बाहर अपनों की खबर का इंतजार, आंखों में आस और दिल में डर

27/8/2026, 5:22:36 am
काठमांडू के अस्पताल के बाहर अपनों की खबर का इंतजार, आंखों में आस और दिल में डर
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काठमांडू के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के बाहर सुबह से ही भीड़ जमा है। हाथ में तस्वीरें, फोन में आखिरी बार की लोकेशन और आंखों में बेचैनी लिए दर्जनों लोग यहां खड़े हैं। ये वे परिवार हैं जिनके अपने पिछले हफ्ते आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद से लापता हैं। बीबीसी नेपाली की संवाददाता श्रीजना श्रेष्ठ ने जब उनसे बात की तो सबकी जुबान पर एक ही सवाल था — "मेरा बेटा कहां है? मेरी पत्नी मिली क्या?" राम बहादुर थापा पिछले तीन दिन से यहीं सो रहे हैं। उनका 17 साल का बेटा स्कूल से लौटते वक्त लापता हो गया। "हर एंबुलेंस की आवाज पर दिल धड़क जाता है," वे कहते हैं। "डॉक्टर कहते हैं शवों की पहचान चल रही है, पर लिस्ट में नाम नहीं आता।" अस्पताल प्रशासन के मुताबिक अब तक 147 शव लाए गए हैं, जिनमें से 89 की पहचान हो चुकी है। बाकी के लिए डीएनए टेस्ट चल रहे हैं। परिजनों को डीएनए सैंपल देने को कहा गया है, पर रिपोर्ट में हफ्तों लग सकते हैं। सुनीता देवी अपनी बहन को ढूंढ रही हैं। वे कहती हैं, "सरकार ने हेल्पलाइन नंबर दिया, पर कोई उठाता नहीं। हम रोज आते हैं, रोज लौट जाते हैं।" नेपाल पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि लापता लोगों की आधिकारिक संख्या 52 है, पर स्थानीय लोग इसे काफी कम बताते हैं। दूरदराज के गांवों से सूचना आना अब भी मुश्किल है। मानसून की बारिश जारी है, जिससे बचाव कार्य धीमा है। फिर भी, इन परिवारों का इंतजार नहीं टूटता। हर नई एंबुलेंस, हर नई लिस्ट एक उम्मीद जगाती है — शायद इस बार नाम मिल जाए। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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