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अमेरिकी सैन्य न्यायाधीश ने 9/11 के मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद का मुकदमा जून 2028 में तय किया

27/8/2026, 3:37:36 am
अमेरिकी सैन्य न्यायाधीश ने 9/11 के मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद का मुकदमा जून 2028 में तय किया
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अमेरिकी सैन्य न्यायाधीश ने 9/11 हमलों के मुख्य साजिशकर्ता खालिद शेख मोहम्मद के मुकदमे की तारीख जून 2028 तय कर दी है। यह फैसला ग्वांतानामो बे स्थित सैन्य आयोग की अदालत में सुनाया गया, जहां मोहम्मद पिछले कई साल से बंद हैं। मुकदमा कई बार टल चुका था क्योंकि सबूत जुटाने, गवाहों को सुरक्षित रखने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में वक्त लगा। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि जून 2028 से सुनवाई शुरू होगी और सभी पक्षों को पर्याप्त तैयारी का समय मिलेगा। खालिद शेख मोहम्मद को 2003 में पाकिस्तान के रावलपिंडी इलाके में गिरफ्तार किया गया था और फिर अमेरिकी हिरासत में भेज दिया गया। तब से वह ग्वांतानामो बे की उच्च सुरक्षा वाली जेल में रखा गया है। उन पर 9/11 हमलों की योजना बनाने, आतंकवाद को बढ़ावा देने और हजारों निर्दोष लोगों की हत्या का आरोप है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि मोहम्मद ने हमले की पूरी रूपरेखा तैयार की थी। 11 सितंबर 2001 के हमलों में लगभग 3,000 लोग मारे गए थे, जिससे पूरी दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तेज हुई। इस घटना ने अमेरिकी विदेश नीति को भी स्थायी रूप से बदल दिया। सैन्य आयोग की प्रक्रिया सामान्य नागरिक अदालतों से अलग है और इसमें सुरक्षा कारणों से कई प्रतिबंध लगे होते हैं। गवाहों की पहचान गुप्त रखी जाती है और कुछ सबूत सार्वजनिक नहीं किए जाते। रक्षा पक्ष ने पहले भी मुकदमे की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन न्यायाधीश ने इसे खारिज कर दिया। उनका तर्क था कि देरी से पीड़ितों के परिवारों को न्याय मिलने में देर होगी। अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह मुकदमा न्याय और पीड़ितों के लिए अहम है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि सुनवाई पारदर्शी और निष्पक्ष होगी। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ग्वांतानामो बे की हिरासत प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं। वे कहते हैं कि लंबे समय तक बिना सुनवाई के रखना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। फिर भी, अदालत ने तय तारीख पर कायम रहने का फैसला लिया है। न्यायाधीश ने कहा कि कानून के मुताबिक प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। अब सभी नज़रें जून 2028 पर टिकी हैं, जब मुकदमा औपचारिक रूप से शुरू होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय कानून और आतंकवाद विरोधी नीति पर बड़ा असर डालेगा। मुकदमे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी और मीडिया को सीमित पहुंच दी जाएगी। अदालत ने सभी पक्षों से सहयोग की अपील की है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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