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भारत

मानसून की बेरुखी: 14% कम बारिश, पर कई राज्यों में बाढ़ का कहर

1/9/2026, 12:23:09 am
मानसून की बेरुखी: 14% कम बारिश, पर कई राज्यों में बाढ़ का कहर
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भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जून से अगस्त तक देश भर में औसतन 14 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि इस कमी के बावजूद कई राज्यों में भारी वर्षा ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार के कई जिलों में सामान्य से कहीं अधिक पानी गिरा, जिससे नदियां उफान पर आ गईं और खेतों में जलभराव हो गया। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके में गंगा और घाघरा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया, जिससे लाखों हेक्टेयर धान और गन्ने की फसल डूब गई। राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ ने सड़कों और रेल मार्गों को बंद कर दिया। मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में भी तेज बारिश ने नालों को उफान पर ला दिया, जिससे ग्रामीण इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़ा। बिहार के उत्तर बिहार में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से कई गांव जलमग्न हो गए और राहत शिविर लगाए गए। आईएमडी ने सितंबर के लिए सामान्य से थोड़ी अधिक बारिश का अनुमान जताया है, लेकिन अभी भी कई इलाकों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। विभाग ने यह भी बताया कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में बादल फटने से अचानक आई बाढ़ ने पर्यटन स्थलों को भी प्रभावित किया। दिल्ली और एनसीआर में भी भारी बारिश के कारण यातायात ठप हो गया और कई निचले इलाकों में पानी भर गया। स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए सफाई अभियान तेज कर दिया है। कृषि मंत्रालय ने फसल नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की अनियमितता आगे भी बनी रह सकती है। इस बीच, जल संसाधन मंत्रालय ने बांधों के जलस्तर की निगरानी बढ़ा दी है ताकि अचानक पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों को बचाया जा सके। केंद्र और राज्य सरकारों ने राहत पैकेज घोषित किए हैं और एनडीआरएफ की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गई हैं। किसानों को फसल बीमा योजना के तहत त्वरित भुगतान का आश्वासन दिया गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल का मानसून असमान रहा है, जिससे कृषि और जल संसाधन प्रबंधन पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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