विश्व
नेपाल में फ्लैश फ्लड: मौत का आंकड़ा 600 के पार
29/8/2026, 7:33:02 pm

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नेपाल के मध्य और पश्चिमी पहाड़ी ज़िलों में पिछले सप्ताह हुई मूसलाधार बारिश ने अचानक फ्लैश फ्लड ला दी।
सिंधुपालचोक, काभ्रे, दोलखा और रामेछाप जैसे ज़िलों में नदियाँ उफान पर आईं और कई गांव पूरी तरह डूब गए।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मरने वालों की संख्या 610 को पार कर चुकी है, जबकि 1,200 से अधिक लोग घायल हुए हैं और लगभग 3,500 परिवार बेघर हो गए।
प्रशासन ने सेना, सशस्त्र पुलिस, नेपाल रेड क्रॉस और स्थानीय स्वयंसेवकों को मिलाकर राहत अभियान तेज कर दिया है।
हेलीकॉप्टर और नावों के ज़रिए प्रभावित इलाकों में खाना, पीने का पानी, दवाइयाँ और तिरपाल पहुँचाए जा रहे हैं।
भूस्खलन के कारण कई मुख्य सड़कें और पुल अब भी बंद हैं, जिससे राहत सामग्री की आपूर्ति में देरी हो रही है।
भारत, चीन, संयुक्त राष्ट्र की विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस ने तत्काल सहायता भेजी है, जिससे राहत कार्य में तेजी आई है।
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे बचाव दलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते ऐसी आपदाएं अब हर साल दोहराई जा रही हैं और सरकार से बेहतर पूर्व-चेतावनी प्रणाली बनाने की मांग कर रहे हैं।
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने आपदा को राष्ट्रीय संकट घोषित किया और सभी मंत्रालयों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने बताया कि मलबे में दबे शवों की तलाश जारी है, इसलिए मृतकों की अंतिम संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।
पिछले साल भी इसी इलाके में बादल फटने से 300 से अधिक लोगों की जान गई थी, लेकिन तब की तुलना में इस बार बारिश की तीव्रता दोगुनी रही।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि बाढ़ के पानी में बैक्टीरिया और मच्छरों के पनपने से हैजा, डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ गया है।
राहत शिविरों में साफ-सफाई और पीने के पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त टैंकर और फिल्टर लगाए जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने नेपाल को आपातकालीन ऋण देने की संभावना जताई है, जिससे पुनर्निर्माण कार्यों के लिए धन उपलब्ध हो सके।
स्थानीय एनजीओ 'नेपाल यूथ फोरम' ने स्वयंसेवकों को घर-घर जाकर नुकसान का आकलन करने और राहत सामग्री बांटने के लिए तैनात किया है।
सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी पुल बनाने के लिए सेना के इंजीनियरिंग कोर को निर्देश दिए हैं, ताकि यातायात जल्द बहाल हो सके।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी ढलानों पर वनों की कटाई और अनियोजित निर्माण ने मिट्टी की पकड़ कमजोर की, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ा।
नेपाल सरकार अब दीर्घकालिक योजना के तहत नदी किनारे बाढ़ सुरक्षा दीवारें और जल निकासी तंत्र मजबूत करने पर विचार कर रही है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
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