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नेपाल में तबाही के बाद नया खतरा: 47 ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं बाढ़ का कारण

27/8/2026, 2:32:39 am
नेपाल में तबाही के बाद नया खतरा: 47 ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं बाढ़ का कारण
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नेपाल में आई भीषण तबाही के अगले ही दिन एक नया खतरा सामने आया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हिमालय क्षेत्र में बनी 47 ग्लेशियल झीलें कभी भी फट सकती हैं। इनसे निकला पानी नेपाल की प्रमुख नदियों में बाढ़ ला सकता है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ये झीलें कोसी, गंडकी और कर्णाली नदी घाटियों में फैली हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे झीलों का आकार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी भूकंप की झटके या भारी बारिश भी इनका बांध तोड़ सकती है। साल 2021 में मेलम्ची नदी में आई अचानक बाढ़ इसी तरह की घटना थी। तब कई गांव बह गए थे और दर्जनों लोग मारे गए थे। इस बार खतरा ज्यादा बड़ा है क्योंकि झीलों की संख्या अधिक है। नेपाल सरकार ने उच्च जोखिम वाली 21 झीलों की निगरानी शुरू कर दी है। सैटेलाइट और ड्रोन से लगातार नजर रखी जा रही है। स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है। निचले इलाकों में रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। भारत के लिए भी यह चिंता की बात है। कोसी और गंडकी नदियों का पानी बिहार और उत्तर प्रदेश तक पहुंचता है। 2008 में कोसी त्रासदी ने बिहार में भारी तबाही मचाई थी। केंद्रीय जल आयोग नेपाल के साथ लगातार संपर्क में है। जलवायु विशेषज्ञ डॉ. अर्जुन कार्की कहते हैं, "हिमालय संवेदनशील है। तापमान बढ़ने से ग्लेशियर झीलें बढ़ रही हैं। हमें जल्दी चेतावनी प्रणाली मजबूत करनी होगी।" नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मदद भी मांगी है। विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां तकनीकी सहयोग दे रही हैं। लेकिन जानकार मानते हैं कि दीर्घकालिक समाधान के लिए कार्बन उत्सर्जन घटाना जरूरी है। फिलहाल नेपाल के पहाड़ी जिलों में तनाव है। लोग रातभर जागकर नदियों का जलस्तर देख रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन प्रकृति के आगे तैयारी कितनी काम आएगी, यह वक्त बताएगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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