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पीएम मोदी ने राज्यमंत्रियों से तीन घंटे की समीक्षा में पूछा – विकसित भारत के लिए आपने क्या किया?

8/9/2026, 11:16:08 pm
पीएम मोदी ने राज्यमंत्रियों से तीन घंटे की समीक्षा में पूछा – विकसित भारत के लिए आपने क्या किया?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में अपने मंत्रिमंडल के राज्यमंत्रियों के साथ तीन घंटे की समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने हर मंत्री से सीधे सवाल पूछे और उनसे पूछा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने व्यक्तिगत रूप से क्या कदम उठाए हैं। मोदी ने कहा कि केवल योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीन पर परिणाम दिखने चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में प्रगति की रफ्तार जाननी चाही। कई मंत्रियों ने अपने विभाग की हालिया उपलब्धियां गिनाईं, लेकिन प्रधानमंत्री ने उनसे ठोस आंकड़े और समयसीमा मांगी। बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि अगले छह महीने में हर मंत्रालय को अपने लक्ष्य की प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। विपक्ष ने इस बैठक को चुनावी तैयारी बताया, जबकि सरकार का कहना है कि यह जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी सीधी जवाबदेही से प्रशासनिक दक्षता बढ़ सकती है, बशर्ते फॉलो‑अप तंत्र मजबूत हो। मोदी ने बैठक की शुरुआत में कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना केवल नारों से पूरा नहीं होगा, इसके लिए हर विभाग को मापदंड तय करने होंगे। उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्री से पूछा कि मनरेगा के तहत कितने नए रोजगार सृजित हुए और उनमें कितने युवा शामिल हैं। शिक्षा मंत्री से उन्होंने डिजिटल क्लासरूम की पहुंच और शिक्षकों की प्रशिक्षण स्थिति पर स्पष्ट आंकड़े मांगे। स्वास्थ्य मंत्री को आयुष्मान भारत के तहत लाभार्थियों की संख्या और दावा निपटान की गति बताने को कहा गया। बुनियादी ढांचा मंत्री से नए राजमार्गों और रेल लाइनों की प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया। डिजिटल इंडिया के प्रमुख ने 5G नेटवर्क के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच के आंकड़े साझा किए। मोदी ने स्पष्ट किया कि हर मंत्री को अगली बैठक से पहले अपनी कार्ययोजना का लिखित विवरण देना होगा, ताकि प्रगति की निगरानी आसान हो। सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता लाएगी और जनता को सीधे लाभ दिखेगा। वहीं, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह बैठक केवल मीडिया कवरेज के लिए आयोजित की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस जवाबदेही को निरंतर रखा गया तो प्रशासनिक सुधार की गति तेज हो सकती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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