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आरक्षण में बढ़ोतरी की मांग, बीजेपी का संतुलन बनाना चुनौती

29/8/2026, 12:42:30 pm
आरक्षण में बढ़ोतरी की मांग, बीजेपी का संतुलन बनाना चुनौती
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हाल के हफ्तों में ओबीसी नेताओं ने आरक्षण के मौजूदा 27 प्रतिशत कोटा को बढ़ाकर 33 या 35 प्रतिशत करने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि ग्रामीण इलाकों में पिछड़ी जातियों की आबादी लगातार बढ़ रही है और उनके शैक्षणिक तथा रोजगार के अवसर अभी भी सीमित हैं। इसी तरह, कुछ दलित और आदिवासी संगठनों ने प्री‑मेट्रिक छात्रवृत्ति में वृद्धि और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का सख्त पालन करने की मांग की है। इसके विपरीत, सामान्य वर्ग के कई युवा संगठन और नेता कह रहे हैं कि मौजूदा प्रणाली Meritorious उम्मीदवारों को अवसर से वंचित करती है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को पहले ही 10 प्रतिशत आरक्षण मिल चुका है, इसलिए कोई और बढ़ोतरी न्यायसंगत नहीं है। वे आय‑आधारित आरक्षण की बात भी उठा रहे हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में ओबीसी नेताओं ने सड़कों पर धरना प्रदर्शन किया है और अगले पंचायत चुनाव में कोटा बढ़ाने की मांग रखी है। इन प्रदर्शनों में किसान यूनियनों और छात्र संगठनों ने भी भाग लिया है। मध्य प्रदेश और गुजरात में सामान्य वर्ग के युवाओं ने #MeritMatters हैशटैग के तहत सोशल मीडिया अभियान चलाया है, जिसमें वे अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। बीजेपी के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ नेता कह रहे हैं कि पार्टी को अपने सामाजिक आधार को बनाए रखते हुए आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित करना होगा। अन्य ने सुझाव दिया है कि राज्य‑विशेष रूप में योजना बनाकर असंतोष को कम किया जा सकता है। इस प्रकार, बीजेपी को दोनों ओर की मांगों को सुनते हुए एक संतुलित नीति तैयार करनी होगी, जो सामाजिक न्याय और merit‑based अवसरों के बीच का सेतु बने। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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