लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

सुभाष चंद्रा की कर्ज़माफी: नीति पर उठते सवाल

3/9/2026, 9:35:21 am
सुभाष चंद्रा की कर्ज़माफी: नीति पर उठते सवाल
Original publisher image
सुभाष चंद्रा, ज़ी एंटरटेनमेंट और एस्सेल ग्रुप के संस्थापक, ने हाल ही में अपने समूह की कंपनियों के लिए दी गई ₹22,000 करोड़ की कर्ज़ गारंटी पर एक समझौता किया। इस समझौते के तहत उन्होंने महज़ ₹6.5 करोड़ का भुगतान किया और बाकी रकम पर छूट प्राप्त की। खबर सामने आते ही सोशल मीडिया और वित्तीय विश्लेषकों में तीखी प्रतिक्रिया देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा पहला मामला नहीं है जब किसी बड़े कारोबारी समूह को कर्ज़ में राहत मिली हो। पिछले कुछ वर्षों में कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने बड़े कॉर्पोरेट घरानों को पुनर्गठन पैकेज या एकमुश्त निपटान के जरिए छूट दी है। लेकिन इन मामलों में अक्सर पारदर्शिता की कमी और ऋणदाताओं के हितों की अनदेखी का आरोप लगता रहा है। वित्त मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह समझौता RBI के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुरूप है और इसका मकसद बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत करना है। फिर भी, कई आर्थिक टिप्पणीकार मानते हैं कि ऐसे सौदों से कर्ज़ अनुशासन प्रभावित हो सकता है और भविष्य में इसी तरह के मामले बढ़ सकते हैं। किसान कर्ज़ माफी की योजनाओं के विपरीत, कॉर्पोरेट क्षेत्र में राहत अक्सर बिना सार्वजनिक बहस के मंजूर हो जाती है। इससे नीतियों के चयनात्मक लागू होने की धारणा मजबूत होती है और जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है। विश्लेषकों की सलाह है कि सरकार कर्ज़ माफी के मानदंड स्पष्ट करे और एक स्वतंत्र समीक्षा तंत्र बनाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सभी हितधारकों के साथ न्याय हो। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

संबंधित