विश्व
तिब्बत ने चीन पर लगाए गंभीर आरोप, ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ पर बीजिंग की चुप्पी से उठे सवाल
29/8/2026, 5:05:20 am

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तिब्बत के सुदूर पहाड़ी इलाके में ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़ ने दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है।
स्थानीय प्रशासन और निर्वासित तिब्बती सरकार का आरोप है कि बीजिंग ने वक्त पर चेतावनी जारी नहीं की और बचाव दल भी देरी से पहुंचे।
हादसा पिछले हफ्ते न्यिंगची क्षेत्र के पास हुआ जहां एक विशाल ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नदी में गिर पड़ा।
इससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई और तिब्बती सूत्रों के मुताबिक कम से कम बारह गांव पूरी तरह बह गए जबकि चालीस से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
धर्मशाला स्थित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के प्रवक्ता ने कहा कि चीनी अधिकारियों को ग्लेशियर में दरारें दिखने की जानकारी कई दिन पहले मिल गई थी लेकिन उन्होंने स्थानीय लोगों को आगाह नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर वक्त पर चेतावनी दी जाती तो बहुत जानें बच सकती थीं।
चीनी विदेश मंत्रालय ने अब तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है जबकि सरकारी मीडिया ने केवल यह बताया कि प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए राहत कार्य जारी है।
सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि बाढ़ का पानी ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदियों तक पहुंच चुका है जिससे भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम में भी अलर्ट जारी किया गया है।
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर पिघलने की घटनाएं बढ़ रही हैं पर चीन सीमावर्ती इलाकों का मौसम डेटा पड़ोसी देशों से साझा नहीं करता।
इससे पूर्व चेतावनी प्रणाली कमजोर पड़ती है और स्थानीय नागरिक सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर रहे हैं जिनमें टूटे घर बहती कारें और मलबे में फंसे लोग दिख रहे हैं।
भारत ने भी इस घटना पर नजर रखी है और विदेश मंत्रालय ने चीन से पारदर्शी जानकारी साझा करने की अपील की है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लेशियर के तेजी से पिघलने का मुख्य कारण वैश्विक तापमान वृद्धि है और इस क्षेत्र में निगरानी तंत्र मजबूत करने की जरूरत है।
स्थानीय लोग अब भी राहत सामग्री के इंतजार में हैं जबकि सड़कें और पुल बह जाने से पहुंच मुश्किल हो गई है।
इस बीच तिब्बती निर्वासित सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं को रोका जा सके।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि बिना सीमापार सहयोग के हिमालयी ग्लेशियर की निगरानी अधूरी रहेगी और जानमाल का नुकसान बढ़ता रहेगा।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
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