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तिलोत्तमा शोम ने बॉलीवुड की टाइपकास्टिंग पर की खुलकर बात

3/9/2026, 12:16:37 pm
तिलोत्तमा शोम ने बॉलीवुड की टाइपकास्टिंग पर की खुलकर बात
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तिलोत्तमा शोम ने 2000 के शुरुआती सालों में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। तब से उन्होंने विभिन्न शैलियों की फिल्मों में काम किया, लेकिन अक्सर उन्हें एक ही तरह के किरदार दिए जाते रहे। उनकी यात्रा की शुरुआत छोटे भूमिकाओं से हुई, जो धीरे‑धीरे प्रमुख भूमिकाओं में बदल गई। अभिनेत्री ने कहा कि इंडस्ट्री में टाइपकास्टिंग एक स्थायी समस्या बन गई है। निर्देशक और निर्माता अक्सर अभिनेत्रियों को सादे, sacrificing या रोमांटिक हीरोइन की छवि में देखते हैं, जिससे उनकी प्रतिभा का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। उन्होंने इस प्रवृत्ति को ‘एक ही mould में ढालना’ कहा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे कई फिल्मों में उन्हें केवल ‘विघ्न बाधा डालने वाली’ या ‘परिवार की संरक्षक’ जैसी भूमिकाएँ मिलीं। ये किरदार हालांकि महत्वपूर्ण थे, लेकिन उनके अभिनय की सीमा को बढ़ाने के बजाय उसी रूटीन में फंसा देते थे। उन्होंने इस पैटर्न को तोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। सनी देओल के साथ काम करने के बारे में तिलोत्तमा ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें अलग दृष्टिकोण दिया। सनी के अनुशासित अभिनय स्टाइल और सेट पर उनकी सरल व्यवहार ने उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सनी के साथ escenas करने से उन्होंने अपने अभिनय में नई गहराई महसूस की। अभिनेत्री ने आगे बताया कि सनी के साथ काम करते समय उन्होंने अपने डायलॉग्स को अधिक प्राकृतिक बनाना सीखा। सनी अक्सर improvisation को प्रोत्साहित करते थे, जिससे तिलोत्तमा को चरित्र के भीतर की भावनाओं को खोलने का मौका मिला। इस współpprāy से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। वे मानती हैं कि बदलाव की गति धीमी है, लेकिन कुछ नई फिल्में और वेब सीरीज़ अब विविध कहानियों पर ध्यान दे रही हैं। नए पीढ़ी के फिल्म निर्माता स्टीरियोटाइप्स से दूर हटकर प्रयोग कर रहे हैं, जिससे अभिनेताओं को अधिक स्वतंत्रता मिल रही है। उन्होंने इस बदलाव को प्रोत्साहित करने की अपील की। तिलोत्तमा ने उद्योग से अपील की कि वह महिला पात्रों को अधिक जटिल और बहुआयामी बनाए। उन्होंने कहा कि जब कहानियों में वास्तविक जीवन के मुद्दे शामिल होते हैं, तो दर्शक भी उनसे जुड़ते हैं और फिल्म का प्रभाव गहरा हो जाता है। उन्होंने अपने भविष्य के प्रोजेक्ट्स में इसी दिशा में काम करने का संकल्प लिया। अंत में उन्होंने कहा कि टाइपकास्टिंग से मुक्त होने के लिए निरंतर प्रयास और बहादुर विकल्पों की आवश्यकता है। उन्होंने दर्शकों से भी विविध सामग्री का समर्थन करने का आग्रह किया, जिससे बदलाव की गति तेज हो सके। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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