लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

यूट्यूब पर एआई डॉक्टर बुज़ुर्गों को निशाना बना रहे हैं, उनकी सलाह जानलेवा साबित हो रही है

26/8/2026, 8:18:05 am
यूट्यूब पर एआई डॉक्टर बुज़ुर्गों को निशाना बना रहे हैं, उनकी सलाह जानलेवा साबित हो रही है
Source feed image
यूट्यूब पर बढ़ते एआई जनित डॉक्टर वीडियो्स ने बुज़ुर्ग दर्शकों का ध्यान खींचा है। इन क्लिप्स में गहरे फेक तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसा दिखाया जाता है मानव डॉक्टर दी जा रही सलाह दे रहे हैं, परंतु वास्तव में ये पूरी तरह कंप्यूटर द्वारा निर्मित होते हैं। इन वीडियो में अक्सर मधुमेह, जोड़ों के दर्द या उच्च रक्तचाप जैसी 흔한 बीमारियों के लिए ‘चमत्कारी’ उपचार बताए जाते हैं, जैसे विशेष herb मिश्रण या असामान्य आहार योजना। दावे करते हैं कि इनसे दवाइयों की जरूरत खत्म हो जाती है और कुछ ही दिनों में बीमारी गायब हो जाएगी। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की सलाह पर भरोसा करना खतरनाक है। कई बुज़ुर्ग ने अपने निर्धारित उपचार छोड़ दिए और इन नुस्खों को आजमाया, जिसके परिणामस्वरूप गुर्दे की क्षमता कम होना, रक्त शर्करा का असंतुलन या zelfs दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। यूट्यूब की मौजूदा नीतियों में इस तरह के गलत медицинский контент को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं हैं। जबकि प्लेटफॉर्म ने कुछ वीडियो हटाए हैं, नए एआई जनित चैनल्स तेजी से उभर रहे हैं और उनकी पहुँच बुज़ुर्ग आबादी तक सीधी है। Indian Medical Association और AIIMS जैसी संस्थाओं ने सार्वजनिक advisories जारी किए हैं, urging परिवार सदस्यों को प्रियजनों के देखे जा रहे वीडियो की सत्यता जांचने के लिए कहना। वे सुझाव देते हैं कि किसी भी स्वास्थ्य दावे की पुष्टि केवल मान्यता प्राप्त चिकित्सक या सरकारी स्वास्थ्य पोर्टल से करें। बुज़ुर्गों को खुद भी कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए: अनजाने चैनल्स पर भरोसा न करना, टिप्पणियों और लाइक्स की संख्या को सत्यापता मानक नहीं मानना, और किसी संदिग्ध वीडियो को तुरंत प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करना। डिजिटल साक्षरता अभियानों को स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में चलाना भी इस समस्या से लड़ने में मददगार हो सकता है। अंत में, तकनीक के दुरुपयोग से बचने के लिए नियामक枠組み में सुधार की आवश्यकता है। प्लेटफॉर्म को AI जनित कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाने चाहिए, और स्वास्थ्य संबंधी दावों की जाँच के लिए स्वतंत्र fact‑checking टीमों को सशक्त बनाना होगा। केवल जागरूकता और सावधानी ही बुज़ुर्गों की सेहत को इस नए खतरे से बचा सकती है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

संबंधित