लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

मायावती के संन्यास के बाद अशोक सिद्धार्थ ने लिखा पत्र, कहा – मैं भी छोड़ रहा हूँ राजनीति

10/9/2026, 6:28:39 am
मायावती के संन्यास के बाद अशोक सिद्धार्थ ने लिखा पत्र, कहा – मैं भी छोड़ रहा हूँ राजनीति
Original publisher image
बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछले सप्ताह एक सार्वजनिक बयान में कहा कि वह सक्रिय राजनीति से संन्यास ले रही हैं। इस घोषणा ने पार्टी कार्यकर्ताओं, सहयोगियों और विपक्षी दलों को चौंका दिया। मायावती ने कहा कि वह अब पार्टी के मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगी और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने अपने फैसले को स्वास्थ्य और पार्टी के भविष्य के लिए जरूरी बताया। पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए मायावती को एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भी अब राजनीति से दूर रहेंगे। सिद्धार्थ ने लिखा, "आपके फैसले का सम्मान करते हुए मैं भी अपना राजनीतिक सफर यहीं समाप्त करता हूं।" सिद्धार्थ लंबे समय तक बसपा के केंद्रीय नेतृत्व के करीबी रहे हैं। वह 2014 से 2020 तक राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पार्टी में उन्हें संगठनात्मक कौशल और दलित मतदाताओं को जोड़ने की क्षमता के लिए जाना जाता था। उनके पत्र के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने चुप्पी साध ली, जबकि कुछ कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के फैसले को युग का अंत बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे बसपा के आंतरिक समीकरणों पर गहरा असर पड़ सकता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिद्धार्थ ने अपने पत्र में यह भी कहा कि वह भविष्य में सामाजिक कार्यों और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहेंगे, लेकिन किसी भी राजनीतिक पद या दल की जिम्मेदारी नहीं लेंगे। इस कदम को कई लोग पार्टी के लिए बड़े झटके के रूप में देख रहे हैं। मायावती ने अभी तक सिद्धार्थ के पत्र पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि नेतृत्व उनके फैसले का सम्मान करता है और आगे की रणनीति पर विचार करेगा। विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को बसपा की कमजोरी का संकेत बताया है। भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि दलित वोट बैंक अब नए विकल्प तलाश सकता है। दूसरी ओर, बसपा के युवा कार्यकर्ताओं ने सिद्धार्थ के फैसले को साहसिक कदम बताया और कहा कि पार्टी को नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ना चाहिए। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित