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सुप्रीम कोर्ट ने एचपीवी टीकाकरण पर रोक लगाने की याचिका खारिज की

10/9/2026, 7:22:04 am
सुप्रीम कोर्ट ने एचपीवी टीकाकरण पर रोक लगाने की याचिका खारिज की
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एचपीवी टीकाकरण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। याचिका एक सामाजिक कार्यकर्ता ने दायर की थी, जिसमें टीके के संभावित दुष्प्रभावों पर चिंता जताई गई थी। अदालत ने याचिकाकर्ता की दलील सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा। अदालत ने साफ कहा कि टीके की सुरक्षा और प्रभाव को लेकर उठे सवाल गंभीर हैं और उन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। हालांकि, मौजूदा टीकाकरण अभियान को रोकना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से उचित नहीं होगा। न्यायाधीशों ने जोर दिया कि रोक लगाने से टीकाकरण में देरी हो सकती है और इससे अधिक जोखिम पैदा हो सकता है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कुछ राज्यों में स्कूली लड़कियों को टीका लगने के बाद बुखार, जोड़ों में दर्द और केस में गंभीर एलर्जी जैसी प्रतिक्रियाएं देखी गई हैं। उन्होंने इन घटनाओं का विस्तृत विवरण मांगा और अस्थायी रोक की अपील की। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एचपीवी टीके को सुरक्षित और प्रभावी माना है। सरकार ने कहा कि टीके का लाभ जोखिम से काफी अधिक है और इसके चलते लाखों महिलाओं को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाया जा सकता है। न्यायमूर्ति एस.के. कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जनहित में टीकाकरण जारी रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि टीकाकरण रोका जाता है तो देश के कैंसर रोकथाम कार्यक्रम पर असर पड़ेगा और आने वाले वर्षों में कैंसर के मामले बढ़ सकते हैं। अदालत ने साथ ही निर्देश दिया कि टीके के दुष्प्रभावों की निरंतर निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई जाए। इस समिति में डॉक्टर, epidemiologist और patient representatives शामिल होंगे। समिति को छह महीने में अपनी रिपोर्ट देनी होगी और आवश्यक सुधार सुझाने होंगे। यह निर्णय देशभर में चल रहे स्कूली लड़कियों के टीकाकरण कार्यक्रम के लिए राहत भरा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले साल तक लगभग 2.5 करोड़ लड़कियों को टीका लगाया जा चुका है और वार्षिक लक्ष्य 1 करोड़ नई खुराक का है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि वह अदालत के निर्देशों का पालन करेगा और टीकाकरण की गति बनाए रखेगा। मंत्रालय ने स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना बनाई है ताकि अभिभावकों को टीके के फायदे और सुरक्षा के बारे में सही जानकारी मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि एचपीवी टीका गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की रोकथाम में अहम भूमिका निभाता है। विश्व स्तर पर studies से पता चलता है कि टीका लगवाने वाली महिलाओं में इस प्रकार के कैंसर के मामले में 70 से 90 प्रतिशत तक कमी आई है। यदि याचिकाकर्ता चाहे तो वह उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है। कानून विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत के फैसले के खिलाफ अपील की संभावना कम है क्योंकि निर्णय मौजूदा वैज्ञानिक साक्ष्य पर आधारित है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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