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भारत की धरती पर जापानी एफ-2 फाइटर जेट उतरा, BRICS से पहले सब हैरान

10/9/2026, 5:48:58 am
भारत की धरती पर जापानी एफ-2 फाइटर जेट उतरा, BRICS से पहले सब हैरान
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दस सितंबर 2026 को जापान की एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के दो एफ-2 फाइटर जेट्स ने राजस्थान के जोधपुर हवाई अड्डा पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की। इस लैंडिंग को पूर्व निर्धारित द्विपक्षीय अभ्यास “वीर गार्जियन” का हिस्सा माना जा रहा है। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के वायु सेनाओं के बीच आपसी समझ और संचालन की क्षमता को बढ़ाना है। जापानी पायलट्स ने उड़ान भरने के बाद हवा में कुछ मिनट तक मार्किंग maneuvers किए, फिर जोधपुर की पट्टी पर उतरने का निर्देश मिला। लैंडिंग के समय सुबह दस बजे था, जब हवा की स्थिति स्थिर थी। भारतीय वायु सेना के अधिकारी विमानों को पार्किंग एरिया में ले गए और तकनीकी टीम ने तुरंत निरीक्षण शुरू कर दिया। अभ्यास के दौरान भारतीय सुखोई-30MKI और मिराज 2000 विमानों ने एफ-2 के साथ संयुक्त उड़ान भरी। इससे दोनों पक्षों ने रडार लिंक, संचार प्रोटोकॉल और हमलावर रणनीतियों पर डेटा साझा किया। अभ्यास coordinators ने कहा कि ऐसे संयुक्त मिशन से दोनों सेनाओं की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होता है। इस घटना की खबर जैसे ही मीडिया में आई, रक्षा विशेषज्ञों और सामान्य नागरिकों में आश्चर्य का माहौल बन गया। कई लोगों ने कहा कि_BRICS शिखर सम्मेलन से पहले ऐसा दृश्य देखना अप्रत्याशित था।_BRICS समूह की आगामी बैठक, जो इस साल नवंबर में होनी है, में आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी। लेकिन रक्षा क्षेत्र में हो रहे सहयोग ने ध्यान खींचा। भारत और जापान के बीच पिछले दशक में रक्षा संबंध steadily बढ़े हैं। 2020 में हुए लॉजिस्टिक्स एग्रीमेंट और 2022 में साइन किए गए अधिग्रहण एवं क्रॉस सर्विस समझौते (ACSA) इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। विशेषकर चीन के बढ़ते समुद्री और हवाई प्रभाव को देखते हुए दोनों देश समुद्री सुरक्षा, हवा रक्षा और साइबर सुरक्षा पर सहयोग बढ़ा रहे हैं। जोधपुर में हुए लैंडिंग को दोनों पक्षों ने ‘विश्वास निर्माण का प्रतीक’ बताया। जापान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह के अभ्यास से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। भारतीय रक्षा मंत्रालय के officres ने भी जोर दिया कि ऐसे आदान-प्रदान से सेनाओं की तैयारी और क्षमता दोनों को मजबूत बनाता है। भविष्य में दोनों देशों ने वार्षिक रूप से इस तरह के अभ्यास को जारी रखने की योजना बनाई है। अगले सालmaritime esercizio ‘मलाबार’ में भी भाग लेने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रयास इंडो-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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