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पेरिस में तीन देशों की बैठक: लेबनान संकट सुलझाने की नई पहल

17/9/2026, 6:26:07 am
पेरिस में तीन देशों की बैठक: लेबनान संकट सुलझाने की नई पहल
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पेरिस में 19 सितंबर को तीन अहम देशों के वरिष्ठ अधिकारी जुटेंगे। मकसद — लेबनान में महीनों से जारी राजनीतिक गतिरोध तोड़ना। अमेरिका, फ्रांस और सऊदी अरब के प्रतिनिधि बंद कमरे में बातचीत करेंगे। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बैठक की पुष्टि की है। लेबनान में अक्टूबर 2022 से राष्ट्रपति पद खाली है। संसद 12 बार मतदान कर चुकी है, पर कोई उम्मीदवार दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सका। कार्यवाहक प्रधानमंत्री नजीब मिकाती की सरकार सीमित अधिकार से काम चला रही है। आर्थिक संकट, बैंकिंग ठप्पी और बुनियादी सेवाओं की कमी ने जनजीवन बिगाड़ रखा है। फ्रांस पहलकदमी ले रहा है। पेरिस में उसके राजनयिक सूत्रों के मुताबिक बैठक का एजेंडा साफ है — राष्ट्रपति चुनाव की राह खोलना, सुधार पैकेज पर सहमति बनाना और अंतरराष्ट्रीय मदद बहाल करना। अमेरिकी उपविदेश मंत्री बारबरा लीफ और सऊदी अरब के वरिष्ठ राजनयिक नजर अब्दुलअजीज अल-खरीजी हिस्सा लेंगे। पश्चिमी कूटनीतिज्ञ मानते हैं कि लेबनान के दो प्रमुख गुटों — हिज़्बुल्लाह समर्थक और विरोधी खेमे — के बीच सहमति के बिना कुछ नहीं बदलेगा। फ्रांस चाहता है कि सऊदी अरब अपने असर का इस्तेमाल कर सुन्नी नेताओं को बातचीत के लिए राजी करे। वहीं अमेरिका हिज़्बुल्लाह पर दबाव बनाए रखने के पक्ष में है। बैठक से पहले फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लेबनानी नेताओं से फोन पर अपील की — "वक्त निकल रहा है, देशहित में समझौता करें।" लेबनान की सेना प्रमुख जनरल जोसेफ औन का नाम राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर चल रहा है, पर हिज़्बुल्लाह ने अब तक समर्थन नहीं दिया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 3 अरब डॉलर का कर्ज कार्यक्रम मंजूर किया है, पर शर्तें — बैंकिंग सुधार, पूंजी नियंत्रण कानून, राजकोषीय अनुशासन — पूरी नहीं हुईं। पेरिस बैठक में इस पर भी चर्चा होगी। विश्लेषक सावधान हैं। 2020 में बेरुत धमाके के बाद भी ऐसी बैठकें हुईं, पर नतीजा नहीं निकला। इस बार फर्क यह कि सऊदी अरब सीधे शामिल है। खाड़ी देशों की आर्थिक मदद लेबनान के लिए अहम है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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