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भारत

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: जिनपिंग का भारत दौरा, मोदी से द्विपक्षीय बैठक संभव

10/9/2026, 5:38:17 am
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: जिनपिंग का भारत दौरा, मोदी से द्विपक्षीय बैठक संभव
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना तेज़ हो गई है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि नई दिल्ली में अगले महीने होने वाले सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक द्विपक्षीय बैठक तय की जा सकती है। यह खबर ऐसे वक्त आई है जब दोनों देशों के बीच लद्दाख की गलवान घाटी और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव अब भी बरकरार है। पिछले साल जून में गलवान में हुई खूनी झड़प के बाद से दोनों तरफ से सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई है और सीमा पर बुनियादी ढांचा भी मजबूत किया गया है। फिर भी दोनों पक्षों ने सैन्य स्तर की कई दौर की बातचीत जारी रखी है और डिसइंगेजमेंट के कुछ कदम उठाए गए हैं। ब्रिक्स मंच पर चीन, भारत, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका एक साथ आते हैं और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश करते हैं। इस बार के एजेंडा में आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और कोविड‑19 के बाद की स्वास्थ्य तैयारियाँ शामिल हैं। अगर जिनपिंग दिल्ली पहुँचते हैं तो यह 2020 के बाद पहली बार होगा जब कोई चीनी राष्ट्रपति भारतीय सरज़मीन पर कदम रखेगा। मोदी और जिनपिंग की आमने‑सामने मुलाकात से सीमा विवाद पर नई दिशा मिल सकती है और विश्वास बहाली की प्रक्रिया तेज होगी। दोनों नेताओं ने पहले भी फोन और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बात की है, लेकिन प्रत्यक्ष बैठक का सियासी असर अलग होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि द्विपक्षीय वार्ता से सीमा पर तनाव कम करने के ठोस कदम निकल सकते हैं। हालांकि अभी तक विदेश मंत्रालय की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है, पर तैयारियाँ जोरों पर हैं और सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं। भारतीय विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि ब्रिक्स में चीन की भागीदारी भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम है क्योंकि यह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करता है। पिछले ब्रिक्स सम्मेलन में चीन ने भारत के साथ व्यापार असंतुलन पर चर्चा की थी और दोनों देशों ने निवेश बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इस बार भी उम्मीद है कि दोनों पक्ष डिजिटल अर्थव्यवस्था, फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और कृषि निर्यात पर नए समझौते कर सकते हैं। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने सरकार से सीमा सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब मांगा है और जिनपिंग की यात्रा को राजनीतिक संकेत मान रहे हैं। संसद के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे पर बहस होने की संभावना है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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